WhatsApp का नया प्लान: Status और Channels से Ads हटाने के लिए आ सकता है Paid Subscription

29 Jan 2026 3 min read Mobile
WhatsApp का नया प्लान: Status और Channels से Ads हटाने के लिए आ सकता है Paid Subscription
Image Credit: CyberDaily.tech Team (Created with AI)
WhatsApp अब सिर्फ एक साफ‑सुथरा मैसेजिंग ऐप नहीं रहने वाला; Meta ने इसे धीरे‑धीरे एक और मोनेटाइज़ेशन चैनल में बदलना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी अब Status और Channels सेक्शन में आने वाले विज्ञापनों से छुटकारा पाने के लिए एक पेड, ad‑free सब्सक्रिप्शन प्लान लाने की तैयारी कर रही है, जिसे यूज़र चुनकर इन दो टैब्स से प्रमोटेड कंटेंट और स्पॉन्सर्ड चैनल्स हटा सकेंगे।

अभी के लिए WhatsApp के मुख्य चैट इनबॉक्स में कोई बैनर या विज्ञापन नहीं दिख रहा, लेकिन पिछले साल से Status और Channels में एड्स का टेस्ट शुरू हो चुका है। ये एड्स ज़्यादातर बिज़नेस प्रोमोशन और ब्रांडेड कंटेंट के रूप में दिखते हैं और यूज़र्स के फीड के बीच में घुस जाते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta इन्हीं एड्स को दूर करने के लिए एक वैकल्पिक सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रहा है, जिसे यूज़र महीने की फीस देकर ले सकेंगे।

कुछ टेक पब्लिकेशन्स ने WhatsApp के नए ऐप वर्ज़न के कोड में ऐसे स्ट्रिंग्स पकड़े हैं जो “no ads in Status & Channels” और “subscription for no ads” जैसे टेक्स्ट की तरफ इशारा करते हैं। इनमें यूज़र को दो विकल्प दिखने की बात आती है – या तो Status और Channels को बिना पैसे के एड्स के साथ इस्तेमाल करें, या एक निश्चित मासिक शुल्क देकर इन टैब्स से सभी एड्स और प्रमोटेड चैनल्स हटा दें। अभी तक यह साफ नहीं है कि यह प्लान कितना महंगा होगा और भारत समेत किन‑किन देशों में इसे लॉन्च किया जाएगा, लेकिन यूरोप और UK के कुछ रिज़नल टेस्ट की चर्चा ज़्यादा मज़बूत है।

इस तरह का ad‑free सब्सक्रिप्शन Meta पहले से ही Facebook और Instagram पर कुछ देशों में ऑफर कर रहा है, जहां यूज़र एक फीस देकर फीड से विज्ञापनों को हटा सकते हैं। WhatsApp पर भी अगर यही मॉडल लागू होता है, तो यह नीति भी इसी लाइन पर चलेगी – यानी चैट्स अभी भी एड‑फ्री रहेंगे, लेकिन Status और Channels जैसे फीड‑आधारित सेक्शन में या तो एड्स दिखेंगे या फिर यूज़र को उन्हें हटाने के लिए पैसे देने होंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta इस प्लान को यूरोपीय डेटा और प्राइवेसी गाइडलाइंस के जवाब में भी तैयार कर रहा है, ताकि यूज़र को “pay to remove ads” का ऑप्शन मिल सके।

भारत जैसे बड़े मार्केट में WhatsApp के लगभग हर तीसरे स्मार्टफोन यूज़र पर मौजूद होने के चलते यह फैसला बहुत अहम है। अगर यह ad‑free सब्सक्रिप्शन भारत में भी लाया जाता है, तो यहां के यूज़र्स के लिए एक नया चुनाव खड़ा होगा – या तो Status और Channels में एड्स के साथ फ्री एक्सपीरियंस लें, या थोड़ी फीस देकर इन टैब्स को साफ रखें। अभी तक Meta ने इस प्लान को आधिकारिक तौर पर कन्फर्म नहीं किया है, लेकिन ऐप के अंदर के कोड और टेस्ट इंटरफ़ेस से साफ दिख रहा है कि कंपनी इस दिशा में सीरियस तैयारी कर रही है।

अगर यह प्लान लॉन्च होता है, तो WhatsApp भारतीय यूज़र्स के लिए भी एक नया मॉनेटाइज़ेशन और यूज़र‑चॉइस मॉडल लेकर आएगा, जहां “ad‑free” अब सिर्फ विशेष ऐप्स या प्रीमियम सर्विसेज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म पर भी इसकी रेस तेज़ हो जाएगी।

स्रोत: Android Authority, NewsBytes

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. WhatsApp पर क्या अब पूरा ऐप पेड हो जाएगा?

A. नहीं, WhatsApp का बेसिक मैसेजिंग ऐप फ्री ही रहेगा; अभी की रिपोर्ट्स में सिर्फ Status और Channels से एड्स हटाने के लिए एक अलग पेड सब्सक्रिप्शन की बात है, न कि पूरे ऐप के लिए पैसा।

Q2. WhatsApp के Status और Channels में अब एड्स क्यों दिख रहे हैं?

A. Meta अपने प्लेटफ़ॉर्म्स पर रेवेन्यू बढ़ाने के लिए Status और Channels जैसे फीड‑आधारित सेक्शन में एड्स टेस्ट कर रहा है, जहां ब्रांड्स अपने प्रोमोशन और कंटेंट दिखा सकें।

Q3. Ad‑free WhatsApp सब्सक्रिप्शन कितने रुपये का हो सकता है?

A. अभी आधिकारिक कीमत नहीं बताई गई है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में यूरोप में लगभग €4 प्रति महीने का अनुमान ज़िक्र है; भारत में अगर यह प्लान आता है तो कीमत लोकल रेट के हिसाब से अलग हो सकती है।

Q4. क्या WhatsApp के मुख्य चैट्स में भी एड्स आएंगे?

A. अभी के लिए Meta के बयान और रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्य चैट इनबॉक्स में बैनर या विज्ञापन नहीं दिखने की योजना है; एड्स ज़्यादातर Status, Channels और बिज़नेस‑संबंधित फीचर्स तक सीमित रखने की बात है।

Q5. Ad‑free सब्सक्रिप्शन भारत में कब तक आ सकता है?

A. अभी तक कोई आधिकारिक तारीख नहीं दी गई है; रिपोर्ट्स में यूरोप और UK में पहले टेस्ट की बात है, और भारत जैसे देशों में इसके आने का समय Meta की रीजनल पॉलिसी और रेगुलेटरी गाइडलाइंस पर निर्भर करेगा।