Sony का नया PlayStation Controller पेटेंट: बटन के बजाय टचस्क्रीन, खुद बदल सकेंगे बटन की पोज़िशन
कैसा दिखेगा यह कंट्रोलर?
पेटेंट डॉक्यूमेंट में दिखाए गए डिज़ाइन के अनुसार, कंट्रोलर के ऊपरी हिस्से पर एक बड़ी टचस्क्रीन लगी होगी, जहां आज के DualSense या DualShock में D‑Pad, face buttons और thumbsticks मौजूद होते हैं। इस स्क्रीन पर खिलाड़ी खुद तय कर सकेंगे कि D‑Pad, left/right sticks और action buttons को कहां रखना है, उनका साइज़ क्या होगा और कौन‑से बटन को बिल्कुल हटाया जाए। इस तरह हर गेम या हर यूज़र के हाथ के अनुसार लेआउट बदला जा सकेगा।
कस्टमाइज़ेशन और एक्सेसिबिलिटी पर फोकस
इस पेटेंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कंट्रोलर एक फिक्स्ड लेआउट से दूर जाकर “एडेप्टिव” इनपुट सिस्टम की तरफ इशारा करता है। यूज़र अपने हाथ के साइज़, ग्रिप स्टाइल या किसी फिज़िकल लिमिटेशन के हिसाब से बटनों को बड़ा‑छोटा कर सकेंगे, उन्हें बीच में या किनारे पर शिफ्ट कर सकेंगे, या कुछ गेम के लिए तो कुछ बटन ही डिसेबल कर सकेंगे। उदाहरण के तौर पर, एक सिंपल प्लेटफ़ॉर्मर में सिर्फ एक बड़ा जंप बटन रखा जा सकता है, जबकि रेसिंग गेम में एक बड़ा D‑Pad या एक बड़ा लेफ्ट स्टिक फीचर कर सकता है।
सेंसर और टच‑टेक्नोलॉजी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कंट्रोलर में सिर्फ कैपेसिटिव टचस्क्रीन ही नहीं, बल्कि प्रेशर सेंसर और थर्मल सेंसर भी शामिल हो सकते हैं। ये सेंसर यह पहचानने में मदद कर सकते हैं कि उंगली सिर्फ आराम से रखी हुई है या असल में दबाई जा रही है, जिससे मिस‑इनपुट कम होंगे। साथ ही ऑप्टिकल सेंसर या अन्य इनपुट डिटेक्शन टेक्नोलॉजी के ज़रिए टैप, लॉन्ग‑प्रेस, स्वाइप और पिंच जैसे गेस्चर को भी रजिस्टर किया जा सकता है।
क्या यह PS6 कंट्रोलर होगा?
इवेंट के दौरान सामने आया कि यह पेटेंट अभी किसी भी खास कंसोल जैसे PS6 से जोड़कर ऑफिशियली कन्फर्म नहीं किया गया है। हालांकि, कई एनालिस्ट और लीक्स के अनुसार, यह डिज़ाइन आने वाली PlayStation जनरेशन के कंट्रोलर की संभावित दिशा दिखाता है। सोनी पहले भी PlayStation Access जैसे एक्सेसिबल कंट्रोलर लेकर आ चुकी है, और इस नए कॉन्सेप्ट से लगता है कि कंपनी एक ही हार्डवेयर यूनिट के अंदर मल्टीपल यूज़र प्रोफाइल और लेआउट सपोर्ट करना चाहती है।
चुनौतियां और यूज़र रिएक्शन
फिज़िकल बटन के बजाय टचस्क्रीन पर भरोसा करना कई गेमर्स के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि मसल्स मेमोरी और टैक्टाइल फीडबैक की कमी से इन‑गेम रिएक्शन टाइम पर असर पड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कंट्रोलर एक्सेसिबिलिटी और कस्टमाइज़ेशन के लिए बेहतर हो सकता है, लेकिन क्लासिक फील वाले गेमर्स को यह बदलाव पसंद न आए। फिलहाल, सोनी ने इस पेटेंट को भविष्य के प्रोडक्ट के रूप में अभी लॉन्च नहीं किया है, इसलिए यह ज़्यादातर रिसर्च और आइडिया स्टेज पर ही है।
स्रोत: Videocardz, Respawn, Video Games Chronicle, Digit