दूसरी जेनरेशन Apple AirTag भारत में लॉन्च, बढ़ा हुआ रेंज और लाउडर स्पीकर
बढ़ा हुआ रेंज और Precision Finding
दूसरी जेनरेशन AirTag में Apple ने अपनी दूसरी‑जनरेशन Ultra Wideband (UWB) चिप इस्तेमाल की है, जो हाल के iPhone 17, iPhone Air, Apple Watch Ultra 3 और Apple Watch Series 11 में भी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे Precision Finding सिस्टम की कैपेसिटी पहली AirTag की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत दूरी तक बढ़ जाती है। जब यूज़र अपना गुम हुआ सामान ढूंढता है तो iPhone स्क्रीन पर विज़ुअल गाइडेंस, वाइब्रेशन और ऑडियो फीडबैक के ज़रिए सीधे उसे डिवाइस के पास लाया जाता है।
साथ ही, AirTag 2 में ब्लूटूथ चिप भी अपडेट की गई है, जिससे कनेक्टिविटी रेंज बढ़कर आम ऑब्जेक्ट्स के लिए लोकेशन ट्रैकिंग दूर तक चल पाती है। इससे बैग, किट्स या बाइक जैसे ज़्यादा भारी सामान भी घर या ऑफिस की चारदीवारी के बार‑बार चेक किए बिना स्मार्ट तरीके से ट्रैक की जा सकती है। मजेदार रूप से, इस जेनरेशन से पहली बार Apple Watch पर भी Precision Finding का सपोर्ट आया है, जिसने यूज़र को ज़्यादा रियल‑टाइम और wrist‑free ट्रैकिंग एक्सपीरियंस दिलाया है।
लाउडर स्पीकर और ढूंढना आसान
Apple के मुताबिक, दूसरी जेनरेशन AirTag का अंदर पूरा डिज़ाइन दोबारा ऑप्टिमाइज़ किया गया है, जिसमें स्पीकर को लगभग 50 प्रतिशत ज़्यादा लाउड बनाया गया है। इसके नतीजे में AirTag की आवाज़ पुरानी AirTag की तुलना में दोगुनी दूरी तक साफ सुनाई दे सकती है। खासकर तब, जब कोई चीज़ ज़्यादा गहराई में फंसी हो, मसलन की कोचे के बीच, टेबल के नीचे या कार के सीट की फट से सिमटी होई वॉलेट। नई AirTag अपनी अलार्म‑टाइप घंटी के साथ दूर से ही संकेत देकर यूज़र को टारगेट पॉइंट पर पहुंचा देती है।
Find My नेटवर्क और शेयर आइटम लोकेशन
AirTag अभी भी Apple के Find My ऐप पर ही काम करता है, जो iPhone, iPad, Mac और कुछ थर्ड‑पार्टी डिवाइसों को एक ही नेटवर्क में लाता है। अगर AirTag अपनी मालिक iPhone से रेंज से बाहर हो तो Apple के Find My नेटवर्क में लाखों दूसरे Apple डिवाइस उसे ब्लूटूथ के ज़रिए चुपचाप डिटेक्ट कर लोकेशन की जानकारी मालिक तक एन्ड‑टू‑एन्ड एन्क्रिप्टेड तरीके से भेजते हैं।
नई AirTag के साथ Apple ने Share Item Location फीचर को और ज़्यादा अपने ट्रैकिंग इकोसिस्टम में एकीकृत किया है। यूज़र फ्लाइट के ऊपर बैग, मंदिर में छूटे बैग या होटल के कमरे में रहे लगेज जैसे सामान का सामयिक लोकेशन विश्वसनीय पार्टनर – जैसे एयरलाइन के कस्टमर केयर – के साथ साझा कर सकता है। ऐसे Share Item Location लिंक के साथ कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने बैगेज डिले और “ग़ायब” सूट केस के मामलों में कमी दर्ज की है, और यही तकनीक भारत में भी इस्तेमाल की जा सकती है।
सुरक्षा, गोपनीयता और पर्यावरण
Apple ने नई AirTag के बारे में क्लियर किया कि यह डिवाइस पूरी तरह से ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग के लिए बनाया गया है, न कि इंसान या पालतू पशुओं की निगरानी के लिए। डिवाइस में क्रॉस‑प्लेटफॉर्म अलर्ट्स, फ्रीक्वेंटी बदलते Bluetooth आइडेंटिटी, और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन जैसी सुविधाएँ फ़ूट ड्रॉपिंग और गैरक़ानूनी ट्रैकिंग से बचाव में मदद करती हैं। यही नहीं, स्थान डेटा डिवाइस पर स्टोर नहीं होता और Find My नेटवर्क से सारा कम्युनिकेशन एन्ड‑टू‑एन्ड एन्क्रिप्टेड है, जिससे सिर्फ मालिक ही लोकेशन जान सकता है, Apple केसे भी नहीं।
पर्यावरणीय रुख को बढ़ाते हुए Apple ने नई AirTag पर 85 प्रतिशत रीसाइकल्ड प्लास्टिक, सारी मैग्नेट्स में 100 प्रतिशत रीसाइकल्ड रेअर‑अर्थ एलिमेंट और PCB पर 100 प्रतिशत रीसाइकल्ड गोल्ड प्लेटिंग का इस्तेमाल किया है। पैकेजिंग पूरी तरह फाइबर‑आधारित और आसानी से रीसाइकल योग्य है, जो कंपनी के Apple 2030 कार्बन‑न्यूट्रल टारगेट के मुताबिक बढ़ाया गया कदम माना जा रहा है।
अभी नई AirTag के लिए वही प्लान अपनाया गया है कि डिवाइस iOS 26/ iPadOS 26 या उसके बाद के संस्करण वाले iPhone/ iPad के साथ काम करेगी, जबकि Precision Finding वाले खास फीचर के लिए यूज़र के पास Bluetooth‑support वाली Apple घड़ी भी मौजूदा साल के उन्नत मॉडल में होनी चाहिए। भारत के हाइ‑वॉल्यूम EDM यूज़र्स के लिए यह छोटा ट्रैकर हो सकता है कि पुराने स्मार्ट टैग से थोड़ा ऊपर वाला अपडेट, जो ट्रैवेल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और मल्टी‑आइटम लोकेशन ट्रैकिंग को नया लेयर जोड़ देता है।
स्रोत: indianewsnetwork.com, Apple Newsroom