Gemini और Copilot का “AI assist” फीचर: Gmail और दस्तावेजों तक पहुंच का बड़ा सवाल
Google के Gmail में Gemini के जरिए अब यूजर्स अपने पूरे इनबॉक्स से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं, जैसे “पिछले साल इंटरव्यू वाले रिक्रूटर का नाम क्या था?” या “मुझे जो इनवॉइस भेजा था उसकी डेट क्या थी?”। इसके लिए Gemini को आपके ईमेल्स को पढ़ना और उनमें से जरूरी जानकारी निकालना पड़ता है। कंपनी का कहना है कि यह डेटा सिर्फ आपके लिए आयोजित “प्राइवेट स्पेस” में प्रोसेस होता है और इसे Gemini के बेस मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा, लेकिन फिर भी यह साफ है कि आपके सभी ईमेल्स पर AI की नजर पड़ रही है।
इसी कड़ी में Google ने Gmail के लिए “AI Inbox” और “AI Overviews” जैसे फीचर्स भी जोड़े हैं, जो लंबे ईमेल थ्रेड्स को संक्षिप्त करके टास्क लिस्ट बनाते हैं और आपको बताते हैं कि कौन‑सी ईमेल्स पर जल्दी से जवाब देना है। ये फीचर्स आपके व्यवहार, रिश्तों और लिखित भाषा को समझकर काम करते हैं, जिससे इन्हें आपके पूरे ईमेल हिस्ट्री का एक्सेस लेना पड़ता है। कुछ मामलों में यह एक्सेस डिफ़ॉल्ट या ऑप्ट‑इन के रूप में दिया गया है, जिससे यूजर्स को इसके बारे में पहले से साफ जानकारी नहीं मिलती, जो प्राइवेसी के मामले में चिंता का कारण बन रहा है।
दूसरी तरफ, Microsoft का Copilot भी इसी तरह के दायरे में काम कर रहा है। Copilot Windows, Edge और पूरे Microsoft 365 सूट में बिल्ट‑इन आ चुका है और Word, Excel, Outlook और PowerPoint में आपके दस्तावेजों को देखकर टेक्स्ट जनरेट, डेटा समरी और प्रेजेंटेशन सुझाव देता है। इसके लिए Copilot आपके फाइल के उस हिस्से को क्लाउड पर भेजता है जो जरूरी है, और वहां से प्रोसेस करके जवाब वापस भेजता है। Microsoft का कहना है कि फाइल्स को परमानेंट नहीं रखा जाता और यूजर्स अपने प्रॉम्प्ट्स को मॉडल ट्रेनिंग से ऑप्ट‑आउट कर सकते हैं, लेकिन फिर भी यह सच है कि आपका काम अब AI के जरिए रियल‑टाइम में स्कैन हो रहा है।
GitHub Copilot जैसे टूल्स में भी यही पैटर्न दिखता है, जहां कोड एडिटर में आपके फाइल और उसके आस‑पास के कोड को कॉन्टेक्स्ट के रूप में लिया जाता है ताकि रिलेवेंट कोड सजेशन दिए जा सकें। यहां भी कंपनी का दावा है कि डेटा को सुरक्षित तरीके से हैंडल किया जाता है और यूजर्स ऑप्ट‑आउट कर सकते हैं, लेकिन टेक्निकल रूप से यह संभव है कि आपका कोड और डिज़ाइन आइडिया AI मॉडल के लिए कॉन्टेक्स्ट बन जाए।
इन सब के पीछे एक बड़ा ट्रेंड दिखता है: AI कंपनियां “नई ऑयल” के रूप में यूजर डेटा को खोद रही हैं। वे यह तर्क देती हैं कि यह डेटा सिर्फ पर्सनलाइज्ड असिस्टेंस के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन यह भी सच है कि इसके आधार पर भविष्य में नए मॉडल, फीचर्स और बिज़नेस मॉडल बनेंगे। ऐसे में यूजर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे कितना डेटा शेयर करने को तैयार हैं और किस हद तक वे कंपनियों के “डेटा ग्रैब” के नाम पर चल रहे AI assist फीचर्स पर भरोसा कर सकते हैं।
स्रोत: Sify, NYTIMES, reddit