Android ने लॉन्च किए नए Theft Protection फीचर्स, AI‑पावर्ड स्क्रीन लॉक और बायोमेट्रिक चेक
Identity Check: बायोमेट्रिक चेक अब हर सेंसिटिव एक्शन पर
एक बड़ा बदलाव Identity Check फीचर में आया है, जो पहले सिर्फ कुछ सिस्टम‑लेवल सेटिंग्स तक सीमित था। अब इसे इतना विस्तार दिया गया है कि जब भी यूज़र कोई सेंसिटिव एक्शन करता है – जैसे PIN बदलना, थेफ्ट प्रोटेक्शन बंद करना या Passkeys तक पहुंचना – तो उसे बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक) के ज़रिए दोबारा पहचानना पड़ता है, चाहे फोन अनलॉक हो।
इसके साथ ही, Identity Check अब Android Biometric Prompt का इस्तेमाल करने वाले सभी ऐप्स पर भी लागू होता है। इसमें थर्ड‑पार्टी बैंकिंग ऐप्स, वॉलेट ऐप्स और Google Password Manager जैसे हाई‑रिस्क टूल शामिल हैं। यानी अगर कोई चोर आपका PIN जान भी ले, तो बिना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के वह इन ऐप्स में ज़्यादा गहराई तक नहीं जा पाएगा।
Failed Authentication Lock और एंटी‑गेसिंग सुरक्षा
Android 15 में पहले से मौजूद Failed Authentication Lock फीचर को अब और ज़्यादा यूज़र‑फ्रेंडली बनाया गया है। पहले यह फीचर बार‑बार गलत PIN, पैटर्न या पासवर्ड डालने पर स्क्रीन को ऑटोमैटिक तरीके से लॉक कर देता था, लेकिन अब इसके लिए सेटिंग्स में अलग से टॉगल दिया गया है, जिससे यूज़र अपने जोखिम‑सहन और यूज़ केस के हिसाब से इसे ऑन या ऑफ कर सकता है।
साथ ही, Google ने एंटी‑गेसिंग सुरक्षा को भी अपडेट किया है। अब गलत कोशिशों के बाद लॉकआउट का समय बढ़ा दिया गया है, ताकि चोर बार‑बार गलत कोड डालकर लॉक तोड़ने की कोशिश न कर सके। इसी के साथ, यदि कोई एक ही गलत PIN बार‑बार दोहराता है (जैसे बच्चे या गलती से), तो वह गिनती में नहीं आएगा, जिससे अनजाने में लॉकआउट से बचाव होता है।
Theft Detection Lock: AI से फोन की चोरी पकड़ना
Android का Theft Detection Lock फीचर अब और ज़्यादा स्मार्ट हो गया है। यह फीचर फोन के मोशन सेंसर, Wi‑Fi और Bluetooth डेटा को मिलाकर “स्नैच‑एंड‑रन” जैसी मोशन पैटर्न को पहचानता है। जब फोन अनलॉक होने की स्थिति में कोई अचानक उसे छीनकर दौड़ने, साइकिल या बाइक चलाने लगता है, तो ऑन‑डिवाइस AI ऐसी स्थिति को चोरी की कोशिश मानकर स्क्रीन को तुरंत लॉक कर देता है।
इस फीचर को भारत सहित कई देशों में रोल आउट किया जा रहा है, लेकिन कुछ हाई‑रिस्क रीज़न जैसे ब्राज़ील में नए एक्टिवेट होने वाले Android फोन्स पर यह फीचर डिफ़ॉल्ट‑ऑन मोड में आ रहा है, ताकि यूज़र को खुद सेटिंग्स खोलकर इसे चालू करने की ज़रूरत न पड़े।
Remote Lock और सिक्योरिटी चैलेंज
चोरी या खोने के बाद भी यूज़र अपने फोन को android.com/lock पर जाकर किसी भी वेब ब्राउज़र से रिमोट लॉक कर सकता है। अब Google ने इस Remote Lock प्रोसेस में एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जोड़ी है। यूज़र को अब वैकल्पिक सिक्योरिटी चैलेंज या सिक्योरिटी क्वेश्चन पूरा करना पड़ सकता है, ताकि कोई दूसरा व्यक्ति बिना असली मालिक की पहचान के रिमोट लॉक न कर सके।
इससे न सिर्फ यह सुनिश्चित होता है कि रिमोट लॉक सिर्फ असली ओनर द्वारा ही ट्रिगर किया जा सके, बल्कि यह भी कम होता है कि कोई दूसरा यूज़र जानबूझकर या गलती से आपका फोन लॉक कर दे।
भारतीय यूज़र्स के लिए क्या मायने रखता है
भारत जैसे देश में, जहां स्ट्रीट‑लेवल फोन थेफ्ट और UPI‑आधारित फ्रॉड दोनों बढ़ रहे हैं, ये नए थेफ्ट‑प्रोटेक्शन फीचर्स यूज़र्स को थोड़ा ज़्यादा सुरक्षा देते हैं। यदि आपके पास Android 16 या उसके बाद का वर्ज़न वाला फोन है, तो Identity Check, Theft Detection Lock और Failed Authentication Lock को सेटिंग्स में जाकर ऑन करना फायदेमंद रहेगा।
साथ ही, यूज़र्स को अपने Google अकाउंट, बैंकिंग ऐप्स और पासवर्ड मैनेजर में भी अतिरिक्त सुरक्षा जैसे 2‑फैक्टर ऑथेंटिकेशन और स्ट्रॉन्ग पासवर्ड का इस्तेमाल ज़रूर करना चाहिए, क्योंकि कोई भी थेफ्ट‑प्रोटेक्शन फीचर अकेले 100% सुरक्षा नहीं दे सकता।
स्रोत: LinkedIn, The Times of India